Saturday, August 17, 2019

कम वजन वाले नवजात शिशु की देखभाल कैसे करें

hello dosto,
यदि बच्चे का गर्भाधारण का काल पूरा हो गया है। किन्तु बच्चा अभी – भी कम वजन का है। तो इसका अर्थ है। कि बच्चे का गर्भ के अंदर ही पूर्ण विकास नहीं हुआ है। तो ऐसे बच्चों की देखभाल पर पूरा ध्यान देना चाहिए। ताकि बच्चे में पूरा वजन हो । और समय के साथ – साथ सही तरीके से उसका विकास हो सके। आइये समझते है, कि कैसे करें ऐसे बच्चों कि देखभाल।How to care of a low-weight newborn baby read continue..
How to care of a low-weight newborn baby
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गर्भ से ही कम वजन लेकर पैदा हुए। कुपोषित बच्चों कि स्थिति को आई. यू. जी. आर. या इंट्रायूटेराइन ग्रोथ रिटारडेशन भी कहते है। हमारे देश की यह प्रमुख समस्या है। नवजात शिशु का वजन इसलिए कम रह जाता है। क्योंकि माता का गर्भ – काल में पूर्ण पोषण नहीं हो पाता है। जिसका सीधा असर बच्चे पर पड़ता है। हमारे देश में 100 में से 30 बच्चे कम वजन के पैदा होते है। इन बच्चों में कुछ विशेष परेशानियाँ होती है। जिसका बाद में विशेष ख्याल रखना पड़ता है। सामान्य बच्चों की तुलना में इनकी मृत्युदर स्वाभाविक ही अधिक होती है।

कैसे करें ऐसे बच्चों कि देखभाल(How to take care of such children)

How to care of a low-weight newborn baby
  • माँ को पूरे नौ महीने तक आयरन की गोलियां लेनी चाहिए।
  • बच्चे की माँ के शरीर में खून की कमी नहीं होनी चाहिए।
  • गर्भावस्था के समय माँ को केल्सियम, आयरन और फॉलिक एसिड की गोलियां जरूर लेनी चाहिए।
  • फॉलिक एसिड की गोली से बच्चे का स्नायुतंत्र मजबूत होता है।
  • माँ के खानपान और रहने का स्थान का उचित ध्यान रखना चाहिए।
  • किशोरी बालिकाओं को भी तीन महीने तक आयरन की गोलियां देनी चाहिए।
  • गर्भावस्था के समय क्षमता से अधिक काम न करें।
  • गर्भावस्था के समय पानी अधिक पिए और उचित आराम करें।
  • बच्चे की माँ को गर्भावस्था के समय सक्रामक रोग नहीं होना चाहिए।
  • क्योंकि इसका सीधा असर बच्चे पर पड़ता है।
  • पेशाब की जांच से संक्रमण व अन्य रोगों का पता लगाएं।
  • गर्भकाल के समय माँ का वजन 10 से 12 किलो अधिक बढ़ जाना। बच्चे के लिए अच्छा माना जाता है।

ठंड से बचाएं इन्हें(care of a low-weight newborn baby)

ठंड से बचने के जो शारीरिक संसाधन सामान्य बच्चों के शरीर में विकसित होते है। वे इन बच्चों में नहीं हो पाते है। यही वजह है। कि ठंड लगने की वजह से कई दुष्परिणाम इन बच्चों में देखने को मिलते है। यहां तक की ठंड के कारण इन बच्चों की मृत्यु भी हो जाती है। इन बच्चों में रोग – प्रतिरोधक क्षमता बहुत कम होती है। अतः दस्त, श्वसन के रोग, और कई अन्य बीमारियां इनको जल्दी पकड़ लेती है। इनका शारीरिक विकास भी अन्य बच्चों की तुलना कम और देर से होता है। चूकि इनकी शारीरिक बढ़ता माँ के गर्भ में ही कम हो चुकीं होती है। How to care of a low-weight newborn baby.
अतः जन्म के बाद विशेष पोषण भी इनके शारीरिक विकास में कुछ फायदा नहीं करता है। न सिर्फ शारीरिक बल्कि मानसिक विकास में भी ऐसे बच्चे पिछड़ जाते है। आपसी सामंजस्य और भाषा का विकास इनमे धीमा होता है। कुल मिलाकर इनका बौद्धिक स्तर सामान्य बच्चों की तुलना में कम होता है।

कमजोर बच्चों का भविष्य अंधकार में है(The future of weak children is in the dark)

हमारे देश में 30 % बच्चे जन्म से ही कम वजन के होते है। जिनका शारीरिक और मानसिक विकास कम भी कम होता है। ऐसी स्थिति में देश किस तरह विकसित होगा। ये बच्चे बार – बार बीमार पड़ते है। और वयस्क होकर भी सामाजिक और आर्थिक विकास में सहयोग के लायक नहीं बन पाते है। ये बच्चे युवा होकर भी सामान्य युवाओं की तुलना में डायबिटीज व ह्दय रोग के शिकार हो जाते है। इस तरह से कम वजन के शिशु कुछ महा की परेशानी नहीं है। बल्कि इसके लम्बे समय तक दुष्परिणाम है। बच्चों के वजन का कम होने के दो कारण हो सकते है। पहला जेनेटिक या अनुवांशिक। और दूसरा माता को गर्भकाल में पूर्ण पोषण न मिल पाना।

आजकल क्यों बढ़ रहा है चिड़चिड़ापन और गुस्सा

Thursday, August 15, 2019

आजकल क्यों बढ़ रहा है चिड़चिड़ापन और गुस्सा

Hello Dosto, Welcome in Healthy Dunia.
आज आप इस लेख में जानोंगे। कि किन कारणों से युवा पीढ़ी में चिड़चिड़ापन और गुस्सा निरंतर बढ़ रहा है। इससे उनको कौन – कौन सी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। और इसको कम करने के लिए हमे क्या – क्या करना चाहिए। irritability and anger in Hindi read full contant….
irritability and anger  in hindi
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आजकल छोटी – छोटी बातों पर लोगों का मूड खराब हो जाता है। यदि किसी व्यक्ति कि कॉल न लगे । तो मोबाइल फ़ोन फेंक देते है। या वहान चलाते समय साइड न मिलें। तो हॉर्न्स और जरा – सी देर के लिए व्यक्ति परेशान और गुस्सा हो जाता है। वहीं घरों में छोटी – छोटी बातों के लिए झगड़ना। इससे अपनों से ही दूरियां बढ़ती है।

जानिए चिड़चिड़ापन और गुस्सा बढ़ने के कारण (Due to increase irritability and anger in Hindi 2019)

समय बदलने के साथ – साथ व्यक्ति बहुत अधिक व्यस्त होता जा रहा है। उसके लिए समय बहुत किमती होता चला जा रहा है। इसके साथ – साथ उसमे चिड़चिड़ापन और गुस्सा भी बढ़ता जा रहा है। जिसके निम्नलिखित कारण है-

Social Media

इसका जितना फायदा है। उतना ही नुकसान भी है। आजकल प्रत्येक व्यक्ति सोशल मिडिया का इस्तेमाल कर रहा है। यदि किसी भी प्रकार का कार्य हो सोशल मिडिया पर संभव है। इसका अधिक समय तक प्रयोग करने से व्यक्ति और बच्चों पर बहुत – अधिक बुरा प्रभाव पड़ता है। जिससे उनका चिड़चिड़ापन और गुस्सा होना संभव है।

टी. वी. और मोबाइल फ़ोन का इस्तेमाल

अक्सर हम देखते है। कि बच्चे लम्बे समय तक मोबाइल फ़ोन और टी. वी. देखते रहते है। जिसके कारण उनके मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य पर बहुत बुरा – प्रभाव पड़ता है। और बच्चों का सभाव गुस्से वाला और चिड़चिड़ा – सा हो जाता है।

PUBG Game

बच्चों का चिड़चिड़ापन और गुस्सा होने की सबसे बड़ी वजह है। PUBG गेम। यदि किसी बच्चे या व्यक्ति को इस गेम को खेलने की लत लग जाती है। तो उसके लिए वह गेम ही सब कुछ हो जाता है। उसे रात और दिन का कुछ पता नहीं चलता है। वह भूखा रह सकता है। लेकिन इस गेम को नहीं छोड़ता है। इससे उनकी स्मरण शक्ति कम होती है। और आँखों की रोशनी पर बहुत गहरा प्रभाव पड़ता है।

क्षमता से ज्यादा ऋण लेना

जब कोई व्यक्ति किसी बिजनस या अन्य कार्य के लिए ज़्यदा – मात्रा में पैसा उदार ले लेता है। और उसको समय आने पर न देने में असमर्थ हो जाता है। तो उसका सभाव बदल जाता है। उसको चिंता होने लगती है। जब कोई व्यक्ति उससे बात करता है। तो उसके गल पड़ जाता है।यानि उसका सभाव चिड़चिड़ापन और गुस्से वाला हो जाता है।

पास्ट(Past) की बातों को सोचकर

जब किसी परिवार में कोई अचानक बड़ी दुर्घटना हो जाती है। तो उस समय परिवार के लोगों की हलात बहुत खराब रहती है। लेकिन समय बीतने के बाद । किसी समय वहीं बात वापसी याद आने से व्यक्ति के स्वास्थ्य और दिमाग पर बहुत गहरा प्रभाव पड़ता है। व्यक्ति का सभाव चिड़चिड़ा और गुस्से वाला हो जाता है। उसे बात करना या काम करना कुछ भी अच्छा नहीं लगता है।

नींद पूरी न होना

जब किसी व्यक्ति या बच्चे की नींद पूरी नहीं – होती है। या सोते समय अचानक उठा देना। ऐसी स्थिति में बहुत अधिक गुस्सा आता है। और मन चिड़चिड़ा – सा हो जाता है।

नौकरी न मिलना

यदि किसी लड़के या लड़की ने अच्छी पढ़ाई कर रखी है। और इसके बावजूद भी उसको नौकरी नहीं मिलती है। तो इसका असर उसके शरीर और दिमाग पर बहुत गहरा पड़ता है। उसका चिड़चिड़ा और गुस्सा होना भी संभाविक है। उसका आत्मविश्वास डगमगा जाता है।

कमाई से ज्यादा खर्च

जिस व्यक्ति की encome कम और खर्चे ज्यादा होते है। तो उनको पूरा करने के लिए वह बहुत मेहनत करता है। लेकिन इसके बावजूद भी वह अपनी और अपने परिवार की जरूरतों को पूरा नहीं – कर पाता है। जिस कारण उसका सभाव चिड़चिड़ा और गुस्सा वाला हो जाता है।

काम का बोझ

किसी व्यक्ति का अपने बिजनस या ऑफिस से संबंधित काम का भार – अधिक हो जाता है। ऐसी स्थिति में व्यक्ति का परेशान होना संभाविक है। इस कारण से भी व्यक्ति का सभाव चिड़चिड़ा और गुस्से वाला हो सकता है।

चिड़चिड़ापन और गुस्से के लक्षण (Symptoms of irritability and anger in Hindi)

  • जब कोई व्यक्ति या नौजवान युवक एकदम से नशा करना शुरू कर दें।
  • जब किसी के व्यवहार में तेजी से परिवर्तन आने लगें। चिड़चिड़ापन और गुस्सा बढ़ने लगें। या फिर अपशब्द कहने लगें।
  • खानपान और नींद की आदतों में बदलाव आए। तो सावधान हो जाये।
  • व्यक्ति हर समय चिंतित और उदास नजर दिखाई देता है।
  • उसका शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य अस्वस्थ रहता है।

शरीर पर पड़ने वाले दुष्प्रभाव (Body effects)

  • गुस्से में इंसान अनियंत्रित तरिके और मात्रा में नशा करता है।
  • बार – बार गुस्सा करने से ह्दय की पंपिग क्षमता घटती है।
  • जिससे ह्दय की मासपेशियां कमजोर होने लगती है। हार्ट – अटेक की आंशका बढ़ जाती है।
  • एड्रिनलिन, नोराड्रिनलिन सहित कई हार्मोन्स का लेवल बढ़ने से गुस्सा आता है।
  • जिन लोगों को छोटी – छोटी बातों पर गुस्सा आता है। उनको हार्ट, किडनी फेल्योर और पाचन संबंधी दिक्क्तें शुरू हो जाती है।
  • बार – बार गुस्सा आने से चेहरे का रंग लाल हो जाता है। इससे मुंहासे जैसी त्वचा संबंधी समस्याएं हो सकती है।
  • तेज सिर दर्द, माइग्रेन, हाई ब्लड प्रेशर, टेस्टेस्टोरॉन हार्मोन का असंतुलन, बांझपन, कुछ भी अच्छा – नहीं लगता आदि दिक्क्तें उत्तपन होती है।

चिड़चिड़ापन और गुस्सा से बचाव करें ऐसे (Avoid irritability and anger like this in hindi )

irritability and anger  in hindi
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  • बच्चों के साथ कम – से – कम एक घंटा खेले। और उनसे बातचीत करें।
  • अपनों और रिश्तेदारों के साथ बात-चीत करते रहना चाहिए।
  • बच्चों को दादा – दादी और नाना – नानी से मिलवाये।
  • बच्चे को टी वी पर घातक, हिंसक सीरियल और मूवी से बचायें।
  • जब बच्चे कुपोषित होते है। तो चिड़चिड़ापन और गुस्सा बढ़ना स्भाविक है। समय से बच्चों को पहचान जरूरी है।
  • बच्चे अपने आस – पास से ज्यादा सीखते है। जब माता – पिता या अन्य लोग लड़ते है। तो बच्चों का उसका भी प्रभाव पड़ता है।
  • खानपान पर भी रखे ध्यान।
  • ब्रेकफास्ट, लंच और डिनर तीनों समय पर होने चाहिए।
  • मौसमी फल, सब्जियां और एंटीऑक्सीडेंट युक्त चीजें ज्यादा खाएं।
  • भोजन में विटामिन बी और बी 12 अधिक मात्रा में प्रयोग करें। (read more..)
  • पानी खूब पियें। लम्बे समय तक भूखे न रहे।
  • Social मीडिया का कम से कम इस्तेमाल करें।
  • प्रतिदिन प्राणायाम और योग जरूर करने चाहिए।
  • कभी – भी नकारात्म सोच न रखें।
  • हमेशा जो काम करें पूरी ईमानदरी और लग्न से करें।

Tuesday, August 13, 2019

Benefits of Ginseng in Hindi

Hello dosto
Welcome my website Healthy Dunia.in
आज आप इस लेख में जानेंगे। कि जिनसेंग का पौधा क्या है। और कहाँ पाया जाता है। इसके क्या – क्या फायदे (Benefits of Ginseng in Hindi)और नुकसान है। इसका प्रयोग हम किस प्रकार कर सकते है। और इससे कौन – कौन सी बीमारियाँ ठीक होती है।
Benefits of Ginseng in Hindi
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जिनसेंग का पौधा आयुर्वेदिक ओषधियों में बहुत प्रसिद्ध हो गया है। इसका सिर्फ एक ही कारण है। कि इसके गुणकारी और चमत्कारी फायदे – ही – फायदे। जिनसेंग का पौधा प्रत्येक स्थान पर मिल जाता है। इसकी पत्तियां हल्के पिले रंग और छतरी के आकर की होती है। जिनसेंग पौधे की जड़ छोटी और मुलायम होती है। इसको अमेरिकी जिनसेंग के नाम से भी जाना जाता है। इसके फूल जून और जुलाई के महीने में लगते है। यह पौधा बारामासी हरा रहता है। इसकी आयु लगभग 5 से 7 साल की होती है। यह पौधा बहुत ही लाभकारी और गुणकारी माना जाता है।


जिनसेंग के प्रकार (Types of Ginseng in Hindi)



यह पौधा बहुत ही गुणकारी और चमत्कारी है। इसके तीन प्रकार है, जो निम्नलिखित है-
  • ताजा पौधा
  • लाल पौधा
  • सफेद पौधा
  • ताजा पौधा
जब इस पौधे कि आयु दो से तीन साल की होती है। तब यह ताजा पौधा कहलाता है। उस समय इसमें बहुत अधिक फायदेमंद गुण पाए जाते है। जिसका सेवन करने से व्यक्ति को बहुत जल्दी फायदा होता है। उस समय इसकी जड़ो और पत्तियों का रस निकलकर प्रयोग में लिया जाता है।
  • सफेद पौधा
जब इस पौधे की उम्र तीन से पांच साल की हो जाती है। उस समय इसकी जड़ो और पत्तियों को सुखाकर इसका पाउडर बनाया जाता है। और बाद में इसका इस्तेमाल किया जाता है। इस पौधे के केप्सूल भी बनाये जाते है। जिनका भी प्रयोग भी किया जाता है। लेकिन उनका इतना अधिक फायदा नहीं होता है। जितना की जड़ी – बूंटी और रस के सेवन करने से होता है।
  • लाल पौधा
जब इसकी आयु 6 साल या इससे अधिक हो जाती है। तो इसको काटा जाता है। बाद में इसकी जड़ो और छालों को पानी में उबालकर सुखाकर उनका पाउडर और आयुर्वेदिक गोलिया बनाई जाती है। जिनका प्रयोग आप लम्बे समय तक कर सकते है। इसका प्रयोग करने से व्यक्ति की थकान, सर दर्द, जोड़ो का दर्द, प्रतिरोधक क्षमता का कम होना, मधुमेह और कैंसर आदि अनेक खतरनाक बीमारियों से छुटकारा मिलता है।

जिनसेंग पौधे का उपयोग (Use of Ginseng in Hindi)

हर्बल दवाइयों में इस पौधे की जड़ो का प्रयोग बहुत अधिक मात्रा में किया जाता है। इसके साथ – साथ हम इसका प्रयोग चाय, केप्सूल, गोलियों, जड़ो और पत्तियों को सुखाकर पाउडर भी बनाया जाता है। और इसकी पत्तियों का रस निकलकर प्रयोग कर सकते है। इसका प्रयोग हम सर्दियों के मौसम में बहुत अधिक मात्रा में करते है। इसके साथ – साथ इसका प्रयोग बांझपन, अपच,थकान, सर दर्द, जोड़ो का दर्द, प्रतिरोधक क्षमता का कम होना, मधुमेह और कैंसर आदि बीमारियों में अलग – अलग मात्रा में किया जाता है।

Benefits of Ginseng in Hindi

यह एक चमत्कारी लोकप्रिय पौधा है। यह ज्यादातर ब्राजील, साइब एरिया और कोरिया में अधिक पाया जाता है। जिनसेंग एक स्वास्थ्यकारी पर्दार्थ है। जिसकी जड़ गुद्देदार होती है। जिनसेंग पौधे की जड़ी – बूंटिया आपके स्वसस्थ्य और सौंदर्य को विभिन रूपों से प्रभावित करती है।
इसके फायदे निम्नलिखित है।
Benefits of Ginseng in Hindi
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स्मरण शक्ति को बढ़ाना

इस पौधे का आप किसी न किसी रूप में प्रयोग अवश्य करें। आप को बहुत अधिक लाभ मिलेगा। इससे आपकी स्मरण शक्ति तेज हो जाती है। आप जो एक बार पढ़ लेते हो, वह लम्बे समय तक याद रहता है। ध्यान रहे की आप इसका प्रयोग लगातार और लम्बे समय तक करें।

तनाव और थकान को करें दूर

लगातार कुछ दिनों तक जिनसेंग के पौधे की बनी, चाय पीने से आप का मानसिक तनाव और शारीरिक तनाव दूर हो जायेगा। इसके सेवन से आप कभी – भी आलस भरा जीवन व्यतीत नहीं करोगें।

स्वस्थ त्वचा के लिए

अपने चेहरे को स्वस्थ व सुंदर रखने के लिए आप कुछ दिन लगातार जिनसेंग का प्रयोग करें। आप इसका प्रयोग पाउडर, केप्सूल या चाय के रूप में भी कर सकते है।

पाचन शक्ति

इससे आपकी पाचन शक्ति बढ़ती है। और खाया हुआ भोजन अच्छी तरह पचता है। इसलिए आप जिनसेंग का प्रयोग अवश्य करें। यह आपके स्वास्थ्य के लिए बहुत लाभकारी है।

उम्र बढ़ाये

इसका लगातार और उचित मात्रा में प्रयोग करते रहने से आप कि उम्र में बढ़ोतरी होती है। इसमें ऐसे तत्व, विटामिन्स और मिनरल्स पर्दार्थ पाएं जाते है। जो शरीर को स्वस्थ तथा शक्तिशाली बनाये रखते है।

मधुमेह

जिनसेंग मधुमेह रोग का सबसे उत्तम और लाभकारी उपचार है। इसमें ऐसे चमत्कारी कार्बनिक पर्दार्थ और गुण पाएं जाते है। जो मधुमेह के रोग को जड़ से खत्म करने का काम करते है। लेकिन इसके लिए आप को जिनसेंग का प्रयोग लगातार और लम्बे समय तक करना होगा।

weight loss (Benefits of Ginseng in Hindi)

इसमें ऐसे तत्व पाएं जाते है। जो मोटापे को कम करते है। इसका प्रयोग करने से आप आसानी से अपने शरीर में फर्क देख सकते हो। इसके लिए आप जिनसेंग कि चाय, पाउडर और केप्सूल का यूज़ कर सकते है।

योन संबंधी

जिनसेंग के केप्सूल और पॉउडर का लगातार प्रयोग करने से, योन संबंधित समस्याओं से छुटकारा मिलता है। ध्यान रहें, कि इसका प्रयोग आप लगातार और सही मात्रा में ही करें।

बालों को उगाये

जो लोग गंजेपन से परेशान है। जिनके बाल कम है, या सफेद है। उनके लिए जिनसेंग का प्रयोग बहुत ही लाभकारी माना जाता है। इसका लगातार प्रयोग करने से आप के बाल काले व उगने शुरू हो जायगे।

रक्त को करें साफ

लगातार जिनसेंग का प्रयोग करने से रक्त साफ होता है। इससे नया खून भी बनता है। रक्त साफ होने से हमे कई बीमारियों से भी छुटकारा मिलता है।

कैंसर

एक रिसर्च से पता चला है। कि जिनसेंग में ऐसे कार्बनिक पर्दार्थ और गुणकारी तत्व पाएं जाते है। जो कैंसर के प्रभाव को रोकते है। यदि लगातार इसका प्रयोग करें। तो कैंसर जैसी बीमारी से आप छुटकारा पा सकते है।

ऊर्जा के स्तर को बढ़ाना

इसमें ऐसे कार्बनिक पर्दार्थ पाएं जाते है। जो हमारे शरीर में ऊर्जा के स्तर को बढ़ाते है। इससे हमारे शरीर में शक्ति उतपन होती है। जिससे हम अपने जीवन में आने वाली कठिनाइयों का ठटकर सामना करते है। और अपने जीवन में सफलता हासिल करते है।
These all are Benefits of Ginseng in Hindi.


जिनसेंग के नुकसान और सावधानियाँ (Side Effects Of Ginseng in Hindi)

यह एक मसाला होता है। जिसका प्रयोग आप अपने भोजन में करते है। इसका प्रयोग आप को एकदम से अधिक मात्रा में नहीं करना चाहिए। ध्यान रहें। कि जिस समय आप इसका प्रयोग करते है, तो इसकी मात्रा का ध्यान जरूर रखे।
  • नींद की समस्या ।
  • पेट में दर्द ।
  • रक्तचाप में परिवर्तन ।
  • सर दर्द ।
  • चक्कर आना ।
  • मुँह सुखना ।
  • एलर्जी होना।
  • गर्भवती महिलाओं को जिनसेंग का प्रयोग नहीं करना चाहिए।
आमतोर पर ये लक्षण बहुत कम और हल्के होते है। लेकिन आप जिनसेंग का प्रयोग करने से पहले एक बार डॉक्टर से सलाह जरूर ले लें।

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